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टोपर होने के बाद भी हीं दी गई थी नौकरी, 3 दशक बाद व्यक्ति को मिला 80 लाख का मुआवजा

गेराल्ड जॉन जिन्होंने 1989 में देहरादून के सरकारी नौकरी के लिए एक कोलाज में व्यावसायिक शिक्षक के पद के लिए मांग की थी आपको बता दे की थी मेरिट लिस्ट में टॉप करने के बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिली और तो इन्होने सभी इंटरव्यू भी क्लियर किये थे जब उनसे पूछा गए की उनको यह नौकरी क्यों नहीं मिली तो उन्होंने बतया की जिसको यह नौकरी करनी थी उसके पास सभी स्टेनोग्राफी पुरे होने चाहिए जो की उसे वक़्त उनके पास थे नहीं इसकी वजह से उनको यह नौकरी नहीं मिली उसके बाद वो अपना केस लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में गए 1990 में मगर तब भी कुछ नहीं हुआ 2000 में उत्तराखंड के उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद.यह केस नैनीताल चला गया उस वक़्त गेराल्ड जॉन की उम्र 55 हो गई थी उसके बाद साल 2020 दिसंबर में उत्तराखंड हाईकोर्ट में उनका केस गया और कुछ फैसला हुआ था

आपको बता दे की उसके बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट में उनके लिए अच्छा फैसला लिया गया उनको एक स्कूल में नौकरी दी गई और साथ ही उनको 80 लाख का मुआवजे रकम देना का भी एलान किया गया था और खबरों के अनुसार हमको मालूम हुआ है की अभी कुछ वक़्त पहले ही उत्तराखंड सरकार की तरफ से उनको 76 लाख रुपया मिल गए है अब 7 लाख रुपए मुआवजे रकम अभी बाकि है

उन्होंने स्कूल में जोनिंग भी करली है और अब उनकी स्कूल के सबसे वरिष्ठ शिक्षक का पद मिला है हमारे देश में इन्शान को सही जगह बहुत लेट मिलती है चलो हमको ख़ुशी है की उनको मिल तो गई है आखरी उनका हक़ और जिसके वो लायक थे

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