कभी होटल स्टाफ़ की करते थे नौकरी, आज हैं 71 हज़ार करोड़ की कंपनी के मालिक

कभी होटल स्टाफ़ की करते थे नौकरी, आज हैं 71 हज़ार करोड़ की कंपनी के मालिक

Oyo Hotels के फ़ाउंडर रितेश अग्रवाल जिन्होंने 25 साल की उम्र में इतना नाम और पैसा बना लिया है जिसके बारे उनकी उम्र का कोई शख्स इसके सपने ही देखता होगा आज रितेश दुनिया के दूसरे सबसे युवा अरबपती हैं।

पर इस सबसे के साथ साथ उन्होंने मेहनत और कई परेशानियों भी झूली है और हाल ही में उन्होंने अपनी ज़िन्दगी के संघर्ष के बारे में एक इंटरव्यू में बताया है।

रितेश बताते है की ”इंटरप्रेन्योर ये शब्द मैंने बचपन में पहली बार अपनी बहन के मुंह से सुना था. तब मैंने इसके मतलब के बारे में जाना और तभी मैंने तय कर लिया था कि मैं बड़े होकर एक इंटरप्रेन्योर बनूंगा. इसके बाद जब भी मुझसे कोई पूछता कि तुम क्या बनना चाहते तो मैं तपाक से कहता इंटरप्रेन्योर”

‘मैं एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक़ रखता था और हमारा परिवार तब ओडिशा के छोटे से शहर रायगढ़ में रहता था. पर मेरे सपने बहुत बड़े थे और मेरे अंदर Entrepreneur बनने का कीड़ा था. इसके लिए मैंने कभी सिम कार्ड बेचा तो कभी किताब लिखना शुरू कर देता. यहां तक मैंने कई तरह की अतरंगी नौकरियां भी कीं.”

रितेश ने इस बारे में भी बताया की उन्होंने 10वीं के बाद किस तरह अपनी कंपनी की शुरुआत की”रायगढ़ में सीमित अवसर ही थे इसलिए 10वीं पास होने के बाद मेरे पिता ने मुझे कोटा भेज दिया इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने. यहां मैंने देखा कि दुनिया में क्या-क्या हो रहा है. यहां हर वीकेंड पर मैं कोट से दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां होने वाली स्टार्ट-अप फ़ाउंडर्स की कॉन्फ़्रेंस अटेंड करता. वो भी चुपके से. जब वो बताते कि कैसे उन्होंने अपनी सोच को एक भरे-पूरे कारोबार में तब्दील कर दिया, इस बात से मुझे प्रेरणा मिलती थी. 18 साल की उम्र तक मैंने कई होटलों के मालिक और यहां आने वाले कस्टमर्स से बात की. इसके लिए मुझे रेंट पर कमरे लेने पड़ते थे. कई बार इसके लिए मेरे पास पैसे भी नहीं होते थे. पर किसी न किसी तरह मैं इसे मैनेज कर लेता था”



“पर एक दिन मेरे पिता को पता चल गया कि मैं अपनी क्लासेस अटेंड नहीं कर रहा हूं. तब उन्हें समझाना बहुत मुश्किल हो गया था. पर मैं जानता था कि अगर मैं अपना आइडिया उन्हें नहीं बेच सकता तो किसी के साथ ऐसा नहीं कर पाऊंगा. बात काफ़ी बढ़ गई थी मगर मेरी मां ने किसी तरह सिचुएशन को संभाल लिया. इसके बाद मुझे पीटर थिएल फ़ेलोशिप मिल गई. मैं ये स्कॉलरशिप पाने वाला एशिया का पहला नौजवान था”

‘इसकी मदद से मैं पहली बार विदेश गया. यहां मैंने कई होटल्स में बतौर स्टाफ़ काम किया. बेबी सिटिंग की. कस्टमर्स के साथ उनो खेला, इसके लिए कभी -कभी मुझे टिप भी मिल जाती थी. मैं 24 घंटे काम करता रहता था इससे मेरे घर वाले बहुत ही परेशान रहते थे. मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं था, जब तक मैंने एक दिन Oyo Rooms से दुनिया भर के शहरों तक नहीं पहुंचा दिया. ‘

‘मैंने यहां पर बहुत से परिवारों और दोस्तों को अपनी छुट्टियां इंजॉय करते हुए देखा. इसने संतुष्टि और ख़ुशी से भर दिया. आज हम दुनियाभर में लाखों लोगों को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं. इससे मुझे बहुत ही ख़ुशी मिलती है. मगर सबसे ख़ुशी की बात ये है कि मैंने अपना वो सपना पूरा कर लिया जो मैंने 10 साल की उम्र में देखा था.”

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