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अनपढ़ महिला सड़क किनारे अचार बेचकर ऐसे बनी करोड़पति, आज 4 कंपनियों की मालकिन, 4 करोड़ का टर्नओवर है

आत्मनिर्भर तो हर कोई होना चाहता है लेकिन मेहनत करना शायद कोई नहीं चाहता है कुछ लोग ऐसे होते हैं जो खुद को कुछ करना चाहते हैं तो मैं उनके लिए आज एक बात कहूं गई की सपने देखो और उनको पूरा करने की हिम्मत रखो चाहे कुछ भी हो जाए आप अपने सपने का साथ मत छोड़ो उसको पूरा करने के लिए दिन रात एक कर दो।

तो आए हम आज आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने पढ़ाई तो बहुत कम की थी लेकिन उनके दिमाग में आए एक आईडिया जिसकी वजह से आप सोच भी नहीं सकते हैं उन्होंने कितनी कामयाबी हासिल की और आज उनके पास कितनी दौलत और शोहरत है उनके एक आईडिया ने उनकी अपनी मंजिल पर पहुंचा दिया। आज भी हमारे देश में कई ऐसे लोग हैं जो अपने रोजगार की खोज करने के लिए दूसरे शहरों और तो और दूसरे देशों तक में चले जाते हैं कुछ लोग तो ऐसे भी होते हैं जो अपने कारोबार को दूसरे देशों और राज्यों में सेट कर देते हैं में ऐसे लोगों की हिम्मत की डाट देना चाहिए बहुत हिम्मत होती है ऐसा लोगो में।

तो आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके घर की हालत बहुत खराब हो गई थी मजबूर होकर उन्होंने भारत की राजधानी दिल्ली की और आने का फैसला किया और अपने इरादों की वजह से उन्होंने बहुत सफलता पाई और आज उन्होंने अपना एक बहुत अच्छा संसार बनाया यह कहानी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में रहने वाली एक महिला कृष्णा यादव की है 1995 की बात है उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा खराब हो गई थी उनके पति भी मानसिक रूप से बहुत ज्यादा तकलीफो का सामना कर रहे थे ऐसी स्थिति में कृष्णा के सर पर सारा बोझ आ गया थ।

उनकी जिंदगी के इस कठिन वक्त को अपनाते हुए कृष्णा दिल्ली की और आ गई और उस टाइम उनके पास जाने के लिए कुछ पैसे भी नहीं थे तो उन्होंने अपनी एक दोस्त से ₹500 उधार लेकर अपने परिवार के साथ दिल्ली में एक उम्मीद लेकर आ गई । दिल्ली शहर में सफलता पाना कोई आसान बात नहीं है उन्होंने काफी मेहनत की इधर-उधर कोशिश की उनको कहीं तो काम मिल जाए मगर उनको कहीं काम नहीं मिला आखिर में हार मान कर उन्होंने कमांडेट बीएस त्यागी के खानपुर स्थित रेवलाला ग्राम के फार्म हाउस के काम करना सुरु कर दिया कमांडेट त्यागी के फार्म हाउस में बेर और करौंदे के पैदा पड़े लगये हुवे है।

वो वक़्त बाजार में इन फलो की कीमत बहुत अच्छी मिलती थी इसलिए वैज्ञानिकों ने कमांडेट त्यागी को मूल्य संवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण तकनीक से अवगत कराया। वह काम करते करते कृष्णा को भी खेती से बेहद लगाव बढता चला गया उन्होंने वर्ष 2001 में कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा में खाद्य प्रसंस्करण तकनीक का तीन महीने का प्रशिक्षण लेने का निर्णय लिया। उसके बाद कृष्णा ने वहां से ट्रेनिंग लेकर खुद का काम शुरू करने का साहस दिखाया ₹3000 लगाकर 100 किलो करोंदे का अचार बनाया और 5 किलो मिर्ची का अचार बनाया उस अचार को भेजकर उनकी पहली कमाई आई थी ₹5250 हालांकि यह राशि इतनी बड़ी नहीं थी मगर सफलता की तरफ एक अच्छा कदम कृष्णा ने आगे बढ़ाया

यह वक्त उनके जो उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था उनको बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा मगर उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी अपने लक्ष्य की तरफ चलती रहे चलती रही और इस मुश्किल की घड़ी में उनके पति ने भी उनका पूरा साथ दिया कृष्णा अचार अपने घर पर ही बनाती थी और उनके पति सड़क के किनारे बैठ कर उस अचार को बेचते थे ग्राहकों की तरफ से मिले गए अच्छे प्रतिक्रियाओं की वजह से कृष्णा का साहस और बढ़ गया और उन्होंने कई तरीको अचार का निर्माण किए।

आपको बता दें कि आज श्रीमती कृष्णा यादव जो कि अब श्री कृष्णा पिकल्स के नाम से एक ब्रांड बन चुका है इन्होंने कई तरह के अचार मुरब्बे चटनी अभी बनाई कुल 70 आठ उत्पादक का उन्होंने निर्माण किया आपको यह जानकर बहुत हैरानी होगी कि इनका व्यापार अब 500 कुंतल फलों और सब्जियों का उपयोग उपचार शब्दों का उपयोग होता है जिसका मूल्य करोड़ों मे। सड़क के किनारे एक रेहड़ी से लेकर बहुमंजिला इमारत तक की कंपनी कृष्णा ने खुद
के दम पर बनाई थी यह कहानी लोगों को बहुत प्रेरणा देती है

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