एक जोड़ी जूते में गुजारा करने से करोड़पति बनने तक, मां ने कैसे बदली बूम-बूम की किस्मत?

टीम इंडिया के मशहूर खिलाडी जसप्रीत बुमराह आज अपना 29वां जन्मदिन मना रहे हैं. बहुत ही काम वक़्त में उन्होंने बहुत लोकप्रियता हासिल की है हालाँकि बुमराह का लिए सफर बिलकुल भी आसान नहीं था उनकी ज़िन्दगी में एक वक़्त ऐसा भी आए था जब उनके पास में एक जोड़ी जूते और टी-शर्ट ही हुआ करते थे मगर उनको गुजरा करना पड़ता था 1993 में अहमदाबाद में जन्मे बुमराह ने सिर्फ सात की उम्र में अपने पिता को खो दिया था मगर उस उम्र में उन्होंने यह सोच लिया था की उनको क्रिकेटर बनाना है।

बुमराह के इस सफर में उनकी माँ ने उनका भजत ही ज़्यदा साथ दिया था वो अहमदाबाद के स्कूल में टीचर थीं. इतनी आमदनी नहीं थी कि बुमराह के क्रिकेटर बनने के सपने को साकार किया जा सके.दरसल अभी कुछ वक़्त पहले बुमराह ने अपने संघर्ष के दिनों की कहानी बताई थी. उन्होंने कहा ,”पिता को खोने के बाद हम कुछ भी जुटाने के काबिल नहीं थे. मेरे पास एक जोड़ी जूते और एक जोड़ी टी-शर्ट हुआ करती थी. मैं टी-शर्ट को हर दिन धोता था और फिर उसे ही पहन लेता था. जब आप बच्चे होते हैं तो कभी-कभी ऐसी कहानियां सुनते हैं. जीवन में कई लोगों के साथ ऐसा होता है.”।

बुमराह की मां दलजीत ने कहा था, ‘जब पहली बार मैं इसे आईपीएल में खेलते हुए देखी मेरी आंखों से आंसू बहने लगे थे. इसने मेरे संघर्ष को करीब से देखा है आज के वक़्त में बुमराह दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाजों है बुमराह बचपन से आने के बाद घर की छत पर बॉलिंग की प्रैक्टिस करते थे. आवाज नीचे न जाए और मां गुस्सा ना हो. इसलिए बुमराह गेंद को सीधा दीवार के कोने में फेंकते थे 2013-14 में बुमराह ने गुजरात के लिए पहला मैच खेला।

विदर्भ के खिलाफ मैच में उन्होंने सात विकेट लिए और टूर्नामेंट में गुजरात के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे। यहीं से उनका एक्शन चर्चा में आ गया। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के दौरान जॉन राइट ने बुमराह को देखा और उनकी किस्मत बदल दी आपको बता दे की उन्होंने भारत के लिए 162 मैच खेलने वाले बुमराह ने 319 विकेट अपने नाम किए हैं। वह टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक लेने वाले तीसरे भारतीय खिलाड़ी हैं।