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KARMA (कर्मा )के सेट पर दिलीप कुमार को 1 घंटे तक घूरते ते रहे थे अनुपम खेर, फिर सुभाष घर को हुई चिंता…..

बॉलीवुड में ऐसे बहुत ही कम एक्टर है जो कई दशकों तक इंडस्ट्री में बने रहते रहे और हर दशक के लोगो ने उन्हें पसंद किया है वैसे इंडस्ट्री में कई एक्टर्स आए और गए पर कुछ स्टार्स का कोई मुकाबला नहीं है ऐसे ही एक्टर थे दिलीप कुमार उन्हें ट्रेजेडी किंग के नाम से भी जाना जाता था दिलीप साहब करैक्टर में डूब जाया करते थे।वही अगर हम उनकी फिल्म कर्मा की बात करें जो कि सुभाष घई की डायरेक्ट की गई फिल्म 1986 में रिलीज हुई थी कर्मा में पहली बार अनुपम खेर और दिलीप कुमार एक दूसरे से मिले थे।

इस दिलीप कुमार ने जेलर का किरदार निभाया था और उनके साथ इस फिल्म में थे अनुपम खेर जो की डॉक्टर डेंग नाम के रोल निभाया था फिल्म में इन दोनों एक्टर का एक सीन दर्शाया गया था यह सीन इतना दमदार था कि आज भी इसके चर्चे होते हैं. फिल्म में खलनायक का रोल निभाते हुए अनुपम और दिलीप साहब का सीन चल रहा था इस सीन में दिलीप साहब ने डॉ डेंग नाम के खलनायक किरदार को जेलर ने जोरदार थप्पड़ लगाया था और वह सीन काफी पॉपुलर रहा।

अनुपम खेर ने दिलीप कुमार साहब के साथ फिल्म कर्मा के सेट पर उस दिन की याद को ताजा करते हुए बताया जब पहली बार उनसे मुलाकात हुई तो तकरीबन 1 घंटे तक उनको ताकता रहा था. सुभाष घई मुझे साइड में ले जाकरबोले तू मेरी फिल्म का विलेन है ऐसे प्यार से उन्हें घूरते रहोगे तो मुश्किल हो जाएगी,मैंने उनसे कहा जिस शख्सियत की वजह से फिल्मों में आया हूं उन्हें एक घंटा क्या ताऊमर घूर सकता हूं।

उन्होंने बताया की “मेरे पहले शॉट के बाद जब दिलीप साहब कुमार ने सुभाष घई से कहा लाले यह तो बड़ा डेंजरस एक्टर आया है यह दूर तक जाएगा तो मुझे लगा कि मुझे एक्टिंग का सबसे बड़ा पुरस्कार मिला है अब मुझे दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती है “वैसे दिलीप साहब  के निधन पर अनुपम ने इमोशनल वीडियो के द्वारा अपनी यादें और जज़्बात शेयर किए हैं”

 

 

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उन्होंने कहा था की मेरा निजी नुकसान है मैंने एक दोस्त, गाइड,मेंटार और एक्टिंग गुरु को खो दिया है।अनुपम खेर बताते हैं कि उन्होंने स्कूल से भागकर पहली फिल्म देखी थी वह दिलीप जी की गोपी थी।टिकट खरीदने के चक्कर में नाक तुड़वाली। खून बहता रहा मगर फिल्म देखना नहीं छोड़ा।मधुमति 18 बार और राम और श्याम 40 बार देखी है।मुझे उनके साथ चार फिल्मों में काम करने का मौका मिला और मैंने उनके साथ बहुत वक्त गुजारा.मैं उनसे बहुत सवाल करता था 1 दिन हंसकर और शायद तंग आकर बोले तू बंदा है या बंदर। उन्होंने ये भी कहा था की कहते हैं कि दिलीप साहब हिंदुस्तानी सिनेमा की आत्मा है और आत्मा अमर होती है।

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